जब नजर पड़ी घासों पर


जब नजर पड़ी घासों पर
Picture credit: Gautam Mani

आज सुबह जब नजर पड़ी घासों पर
सोचा ये उग कैसे जाते मैदानों पर?

बिन बीज ये उग जाते
क्या मिलता बीज दुकानों पर?

बड़ा इठलाता फसलों के बीच
क्या करता राज खेत-खलिहानों पर?

मैं तो ठहरा शहर का छोरा
ना जाने कैसे खेती होती गाँवों पर?

बचपन में पढ़ा था खरपतवारों पर
क्या ये समस्या बढ़ाता किसानों पर?

आज सुबह जब नजर पड़ी घासों पर
सोचा ये उग कैसे जाते मैदानों पर?
                                               
                                               - सहदेव कुमार

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